सोमवार, 7 अक्टूबर 2013

संतुलित रीपोर्टींग



गुजराती साहित्य परिषद के चुनाव में नरेन्द्र मोदी के तमाम चमचों की हार हूई. यह समाचार का रीपोर्टींग करते हूए गुजरात के हमारे एक पत्रकारमित्र लिखते है, "मोदी के लोगों की परिषद में हार हूई, इसके लिए परिषद का आंतरिक राजकारण जिम्मेदार है." इस सज्जन की 2002 के दंगो में संघियोंने पीटाई की थी. परिणामस्वरूप, अब उनका रीपोर्टींग ‘संतुलित’ हो गया है. इसलिए अब वह ऐसा नहीं लिख सकते कि परिषद में कोम्युनल लोगों की हार हूई.  

शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2013

मंदिर, मस्जिद और शौचालय



मगर सवाल यह था कि बाबरी मस्जिद की जगह मंदिर होना चाहिए, शौचालय होना चाहिए या फिर उसी जगह वापस मस्जिद बननी चाहिए. उस जगह पर मंदिर होना चाहिए ऐसा कहनेवाले अपनी बात घुमाकर ऐसा कहे कि ठीक है मंदिर नहीं बना तो शौचालय बना सकते है. यह बात ठीक नहीं. होना यह था कि उस जगह वापस मस्जिद ही बननी चाहिए थी.

1992 में अयोध्या में जो कुछ भी हुआ, इस देश के बूनियादी उसूलों से खिलाफ था. उस घटना ने देश के कल्चरल हाइजिन से खीलवाड किया था. अगर आप पूरे देश में शौचालय बनाना चाहते है तो शौख से बनाइए. अयोध्या में मस्जिद ही बनानी पडेगी. आज नहीं तो कल. 

और दूसरी बात. हिन्दु और मुसलमान दोनों समुदाय यह बात समज लें कि उनके मंदिरों और मस्जिदों से भी बडी चीज है उन इन्सानों का सम्मान जिन्हो नें आज तक उन का मल ढोया है. हिन्दु-मुसलमान दोनों ने दलितों के साथ नाइन्साफी की है. मंदिर-मस्जिद का विवाद इस नाइन्साफी पर नमक छीडकने जैसा है.

आज का नारा



मोदी लल्ला हम आयेंगे, शौचालय वहीं बनायेंगे

गुरुवार, 3 अक्टूबर 2013

आज का सवाल



क्या भारतवर्ष की गरीब, ओबीसी, आदिवासी, दलित जनता को मूर्ख बनाकर नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में इस देश का मीडीया सफल होगा?

सोमवार, 30 सितंबर 2013

इतिहास रीपीट हो रहा है



उत्तर प्रदेश में आज जिस तरह से अखिलेश की सरकार जाटों की भीड से नीपट रही है, उसे देख कर अस्सी के दसक के गुजरात की याद आ रही है. बस इसी प्रकार उन दिनों आरक्षण-विरोधी उपद्रव से कांग्रेस की सरकार निपट रही थी. कभी निरंकुश पुलीस दमन से तो कभी मेच फीक्सींग से. कहीं शासक पार्टी की मीटींग में पार्टी का सरगना कहता था, अच्छा हुआ यह आंदोलन दंगो में तबदील हो गया, हमारी सरकार बच गई. तो दूसरी और विपक्ष सत्ता पर आने की ताक में आरक्षण-विरोधियों के पीछे बैठकर कार चलाता था, जिसके नीचे आनेवाले दिनों में बहुत सारे "लोग" (उनकी भाषा में पपी) कुचलकर मरनेवाले थे. उस वक्त गुजरात में पटेल समुदाय शासन के खिलाफ सडकों पर उतर आया था. युपी में जाटों को बीजेपी इसी तरह आज भडका रही है. हालात वैसे ही है. युपी का अखिलेश और गुजरात का अमरसिंह. लगता है, इतिहास रीपीट हो रहा है.         

बुधवार, 25 सितंबर 2013

गुगल की गुगली



आज ‘दिव्य भास्कर’ अहमदाबाद की कलश पूर्ति में शबद कीर्तन कोलम में परेश व्यास लिखता है, "गुगल सर्च एन्जिन में आप ‘मोदी जगरनोट’ शब्द टाइप करोगे तो 1,35,000 वेबसाइटों की लिस्ट खूलती है." परेश के यह अदभूत सूझाव से प्रोत्साहित होकर हमने गुगल सर्च एन्जिन पर ‘मोदी रास्कल’ शब्द टाइप किया और 2,87,000 वेबसाइटों की लिस्ट खूल गई. क्या करें?